UPSC Success Story सहरसा के निगम आनंद UPSC पास कर IAS

Last Updated: Jan 21, 2026

Jan 21 • General • 56 Views • No Comments on UPSC Success Story सहरसा के निगम आनंद UPSC पास कर IAS

सहरसा की निगर आनंद: संघर्ष, आत्मविश्वास और UPSC सपने की कहानी

बिहार के सहरसा जिले की रहने वाली निगर आनंद आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने अपने जीवन को कभी सीमाओं में नहीं बांधा। उनका सपना हमेशा बड़ा रहा — UPSC और बैंकिंग जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता हासिल करना। जब अधिकांश लोग मुश्किल हालात में हार मान लेते हैं, तब निगर ने अपने संघर्ष को ही अपनी ताकत बना लिया।

निगर की कहानी सिर्फ एक छात्रा की नहीं, बल्कि उस हौसले की है जो हर उस UPSC aspirant को प्रेरित करता है जो कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा है। UPSC जैसी परीक्षा केवल किताबों की नहीं होती, बल्कि यह धैर्य, आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती की भी परीक्षा होती है।

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दिव्यांगता के बावजूद UPSC सपना बना जीवन का लक्ष्य

निगर आनंद बचपन से ही पढ़ाई में तेज थीं। लेकिन जीवन ने उन्हें एक बड़ी चुनौती दी — शारीरिक दिव्यांगता। कई बार समाज की सोच, लोगों की सहानुभूति और ताने उन्हें कमजोर करने की कोशिश करते रहे। लेकिन निगर ने तय कर लिया था कि वह अपनी पहचान किसी कमजोरी से नहीं, बल्कि अपने लक्ष्य से बनाएंगी।

उन्होंने महसूस किया कि UPSC केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि देश की सेवा का माध्यम है। यही सोच उनके भीतर UPSC को लेकर जुनून बन गई। उन्होंने तय किया कि चाहे रास्ता कितना भी कठिन क्यों न हो, UPSC की तैयारी जरूर करेंगी।

घर पर सीमित संसाधन थे, लेकिन UPSC की किताबें, current affairs और self-study उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गईं। निगर मानती हैं कि UPSC aspirants के लिए सबसे जरूरी चीज है — consistency। रोज थोड़ा पढ़ना, लेकिन रोज पढ़ना, यही उनका मंत्र बना।

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UPSC तैयारी के साथ बैंकिंग परीक्षा की कठिन राह

निगर आनंद ने केवल UPSC पर ही नहीं, बल्कि बैंकिंग exams पर भी ध्यान दिया। कारण साफ था — आत्मनिर्भर बनना और परिवार को आर्थिक सहारा देना। एक तरफ UPSC की vast syllabus, GS papers, current affairs और answer writing, वहीं दूसरी ओर banking की quantitative aptitude, reasoning और English।

यह संतुलन आसान नहीं था। कई बार ऐसा हुआ जब UPSC की पढ़ाई के कारण बैंकिंग mock छूट गया, तो कभी banking practice के चलते UPSC revision प्रभावित हुआ। लेकिन निगर ने हार नहीं मानी।

उन्होंने UPSC और banking दोनों के लिए अलग-अलग study slots बनाए। सुबह का समय UPSC current affairs और static subjects के लिए रखा, जबकि शाम को banking practice किया। UPSC preparation ने उन्हें analytical thinking दी, वहीं banking preparation ने speed और accuracy सिखाई।

उनका मानना है कि UPSC aspirants अगर smart planning करें, तो multiple exams की तैयारी भी संभव है।

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UPSC लक्ष्य पाने के लिए अनुशासन और आत्मविश्वास

निगर की UPSC journey में सबसे अहम भूमिका निभाई — अनुशासन और आत्मविश्वास ने। कई बार असफलता मिली, mock tests में कम marks आए, लेकिन उन्होंने UPSC preparation कभी नहीं छोड़ी।

वह कहती हैं कि UPSC aspirant को comparison से बचना चाहिए। हर व्यक्ति की journey अलग होती है। UPSC में success एक दिन में नहीं आती, बल्कि रोज की मेहनत से बनती है।

निगर ने online resources, newspapers, monthly magazines और self-notes के माध्यम से UPSC syllabus को मजबूत किया। answer writing में सुधार के लिए उन्होंने लगातार practice की और खुद की गलतियों से सीखा।

आज निगर आनंद का सपना सिर्फ खुद UPSC crack करना नहीं है, बल्कि उन सभी दिव्यांग छात्रों को प्रेरित करना है जो यह सोचते हैं कि UPSC उनके लिए नहीं है। उनकी कहानी साबित करती है कि UPSC सबके लिए है — बस हिम्मत और मेहनत चाहिए।

निगर मानती हैं कि UPSC preparation ने उन्हें एक बेहतर इंसान बनाया है। सोचने का नजरिया बदला, आत्मविश्वास बढ़ा और जीवन को देखने का तरीका नया मिला। यही UPSC की असली ताकत है।

उनकी कहानी आज हजारों UPSC aspirants को यह विश्वास दिलाती है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर लक्ष्य UPSC है, तो रास्ता जरूर निकलेगा।

 

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In conclusion, निगर आनंद की कहानी हर UPSC aspirant के लिए प्रेरणा है। दिव्यांगता जैसी बड़ी चुनौती के बावजूद उन्होंने UPSC सपना कभी नहीं छोड़ा। उनकी journey यह सिखाती है कि UPSC सफलता केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि मजबूत इरादों, अनुशासन और निरंतर मेहनत से मिलती है। अगर आप Serious UPSC Aspirants हैं तो सही मार्गदर्शन जरूरी है यूपीएससी के लिए – Best IAS Coaching in Delhi 

UPSC तैयारी ने उन्हें आत्मविश्वास, धैर्य और सकारात्मक सोच दी। यह कहानी साबित करती है कि यदि लक्ष्य UPSC हो और मेहनत सच्ची हो, तो परिस्थितियां रास्ता नहीं रोक सकतीं। UPSC aspirants को निगर से सीख लेनी चाहिए कि विश्वास और संघर्ष से UPSC सपना जरूर पूरा होता है।

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